अगर आप दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी और दर्द भरी कविताएँ पढ़ना पसंद करते हैं,तो “दर बदर” कविता आपके दिल को जरूर छूएगी।यह कविता लेखक ज़िशान आलम की कलम से लिखी गई है,जिसमें मोहब्बत, तन्हाई और बिछड़ने का दर्द झलकता है।यह कविता उनकी किताब “लफ़्ज़ों के मौसम में” की भावना से प्रेरित है।
दर बदर – हिंदी कविता
यूं दर बदर कब तक रहूं ,सोचा कहीं आबाद हो जाऊंया फिरसे तुम्हें याद करता रहूं और मैं बर्बाद हो जाऊंबहुत भागता रहा हूं तुम्हारे पीछे तुम्हारी यादों के पीछेतुम पास ना आये सोचा अब मैं एक जगह ठहर जाऊंमैं तो रात भर जागा हुआ था आंखों में ख़्वाब कहां थेगर ख़्वाब हक़ीक़त होते हैं तो मैं थोड़ा सा सो जाऊंमैं तो खुद को समेटने यूं उस महफ़िल में चला गया थामुझे नहीं मालूम ये महफ़िल तुम्हारी हैं थोड़ा रुक जाऊंबहुत गीत ग़ज़लें सुनी हैं मैंने यहां तुम्हारी तबस्सुम पेसोच रहा हूं थोड़ा सा ठहर जाऊं या यहां से चला जाऊंतुम्हारे बिना अब ये शहर सुना सुना सा लगता हैं यहांक्या तुम्हें याद करूं मैं और तुम्हारी यादों में उलझ जाऊं
Author – Zishan AlamBook – Lafzon Ke Mausam Mein