یا رب، تُو نے مجھے سنبھال رکھا ہے نظم | Zishan Alam urdu poetry
لبوں پر تیرا نام رکھا ہے، یا رب، تُو نے مجھے سنبھال رکھا ہے۔ شروع کرتا ہوں تیرا نام لے کر، تُو…
لبوں پر تیرا نام رکھا ہے، یا رب، تُو نے مجھے سنبھال رکھا ہے۔ شروع کرتا ہوں تیرا نام لے کر، تُو…
अगर आप दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी और दर्द भरी कविताएँ पढ़ना पसंद करते हैं, तो “दर बदर” कवि…
मेरी चाहत एक दिन उसे मेरे करीब खींच लायेगी देखना ये हैं वो कब तक खींची हुई चली आयेगी मुझे भर…
ना जाने किस कबीले से ताल्लुक हैं उसका बस खामोशी से अपने काम को अंजाम देता हैं उसकी आंखें जब जब म…
छोटे से क़बीले से निकला मैं, तेरे शहर आया, साथ कुछ नहीं था मेरे, सिर्फ़ मेरी तन्हाई और मैं अकेला…
मैं ईद कैसे मनाऊं मेरा चांद बादलों की ज़द में खोया हुआ हैं बादलों के घने पहरों की बंदिश में जकड…
मेरे मौला मेरे हक़ में तू बस इतना सा लिख दे मैं जब जब मदीना सोचूं मदीने का दीदार लिख दे मेरे मौ…
"मैंने दर्द को सहना सीखा है, अब मैं खुद को सजा रहा हूं, हर दर्द को एक कहानी बनाकर कोरे काग…
मैं अकेला कहाँ, साथ तुम्हारी यादें भी तो हैं — वो यादें, जो एक ख़ूबसूरत लम्हे से चुरा लाया था…
किसी नामी गिरामी हकीम की दवा लग जाए मुझे या किसी राह चलते दरवेश की दुआ लग जाए मुझे कितनी मुश…
आज एक बड़ी उम्मीद से तेरे दर पर आया हूं मायूस ना करना मुझे मैं बहुत सताया गया हूं ज़माने ने तो…
मैं जली हुई ईट हूं बुनियाद बन जाऊंगा तेरे घर की मुकम्मल दीवार बन जाऊंगा मुझे एक बार आज़मा कर तो…
किसके ज़ख्म भरे यहां कौन घर जाएगा देखना वो शख्स पलटकर वापस आएगा अंधेरों से कह दो वो उजाले से …
बहुत आंसू बहा लिए तुमने इन्हे अब रोक दीजिए जो होना था वो हो चुका उसे अब भुला दीजिए कब तलक ह…
ना दौलत ना शोहरत ना कोई एखतेदार चाहिए मुझे तो बस यहां मेरे सदा होने का हक़ चाहिए किसी खानदानी …
बीच चौराहे पर उसने उसका तमाशा बना दिया मेरी तहज़ीब मैंने उसके सिर पर दुपट्टा रख दिया बाज़ार…
टीपू सुल्तान अंग्रेज़ो के दिलों में एक ख़ौफ़ का पैग़ाम था शायद ही हिंदुस्तान के किसी सुल्तान य…