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कबिले से शहर तक -QABEELE SE SHAHR TAK

छोटे से क़बीले से निकला मैं, तेरे शहर आया, साथ कुछ नहीं था मेरे, सिर्फ़ मेरी तन्हाई और मैं अकेला…

मैं अकेला कहां -MAI AKELA KAHAN

मैं अकेला कहाँ, साथ तुम्हारी यादें भी तो हैं — वो यादें, जो एक ख़ूबसूरत लम्हे से चुरा लाया था…

मौलवी लियाकत अली - MOLVI LIYAQAT ALI .

कल्पना करिए, उस वक्त की विश्व की सबसे बड़ी ताकत ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग लड़ कर अपनी तलवार और…

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