PROTEST POETRY क्योंकि मैं हूँ | Kyunki Main Hoon | ज़िशान आलम byThe zishan's view -दिसंबर 19, 2025 बेशक हुक़ूमत भी तेरी, क़लम भी तेरे, अख़बार भी तेरे, अदालत भी तेरी, गवाह भी तेरे, सबूत भी तेरे—सब…