आस्तीन के साँप — aasteen-ke-saanp — ज़िशान आलम
आस्तीन के साँप – अपनों के धोखे पर हिंदी कविता – ज़िशान आलम दुश्मन अपने ही निकले, शिकायत किस्से…
आस्तीन के साँप – अपनों के धोखे पर हिंदी कविता – ज़िशान आलम दुश्मन अपने ही निकले, शिकायत किस्से…
सरहदी इलाकों में सापों का आदि हो चुका हूं मैं इसलिए अपने साथ दरयाख्त लेकर चलता हूं मैं कौन कब…