تنہا محل urdu poetry by zishan alam
میری زندگی کی واحد کمائی تھا وہ مجھے اکیلا کرکے کیوں چلا گیا وہ ابھی تو اُس نے چلنا بھی نہیں س…
میری زندگی کی واحد کمائی تھا وہ مجھے اکیلا کرکے کیوں چلا گیا وہ ابھی تو اُس نے چلنا بھی نہیں س…
یوں در بدر کب تک رہوں، سوچا کہیں آباد ہو…
لبوں پر تیرا نام رکھا ہے، یا رب، تُو نے مجھے سنبھال رکھا ہے۔ شروع کرتا ہوں تیرا نام لے کر، تُو…
अगर आप दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी और दर्द भरी कविताएँ पढ़ना पसंद करते हैं, तो “दर बदर” कवि…
मेरी ज़िंदगी की वाहिद कमाई था वो, मुझे अकेला करके क्यों चला गया वो। अभी तो उसने चलना भी नहीं स…
बेशक हुक़ूमत भी तेरी, क़लम भी तेरे, अख़बार भी तेरे, अदालत भी तेरी, गवाह भी तेरे, सबूत भी तेरे—सब…
किसी को पाँव की जूती, किसी को सिर पर बैठा लेते हैं, ये दुनिया ऐसी ही है साहब, यहाँ लोग चेहरे बदल…
गर्मी की तपती धूप हूं मैं, सर्दी की चांदनी रात हूं। दिन का सूरज हूं, ना निकलूं तो घर का अंधेरे ह…
मैं तो मुसाफ़िर हूँ, यहाँ थोड़ी देर चला जाऊँगा, यहाँ के हालात देखकर मैं थोड़ा ठहर जाऊँगा। कब, कह…