नई रचनाएँ

तन्हा महल - TANHA MAHAL

मेरी ज़िन्दगी की वाहिद कमाई था वो मुझे अकेला करके क्यों चला गया वो  अभी तो उसने  चलना भी नहीं …

क्योंकि मैं हूं - KYUKI MAI HUN

बेशक हुकूमत भी तेरी  कलम भी तेरे,अखबार भी तेरे अदालत भी तेरी,,गवाह भी तेरे सबूत भी तेरे,,सब के स…

मैं एक बाप हूं-MAI EK BAAP HUN

गर्मी की तपती धूप हूं मैं, सर्दी की चांदनी रात हूं। दिन का सूरज हूं, ना निकलूं तो घर का अंधेरे ह…

मेरी चाहत MERI CHAHAT

मेरी चाहत एक दिन उसे मेरे करीब खींच लायेगी  देखना ये हैं वो  कब  तक खींची हुई चली आयेगी  मुझे भर…

ज़्यादा पोस्ट लोड करें
कोई परिणाम नहीं मिला