تیرے عشق کی تپش Urdu poetry by zishan alam
تیرے عشق کی تپش دیکھنا چاہتے ہیں ہم تیرے عشق میں ایک بار تپنا چاہتے ہیں ہم سنا ہے عشق کی آگ بہت …
تیرے عشق کی تپش دیکھنا چاہتے ہیں ہم تیرے عشق میں ایک بار تپنا چاہتے ہیں ہم سنا ہے عشق کی آگ بہت …
तेरे इश्क़ की तपिश देखना चाहते हैं हम तेरे इश्क़ में एक बार तपना चाहते हैं हम सुना है इश्क़ की…
लश्कर — रहबर और जिंदगी के रास्ते पर हिंदी कविता — ज़िशान आलम वे लश्कर अक्सर हार जाते हैं, जो ब…
دشمن اپنے ہی نکلے، شکایت کس سے کرتے ہم سانپ آستین میں تھے اور گھر سے باہر ڈھونڈتے رہے ہم سانپو…
आस्तीन के साँप – अपनों के धोखे पर हिंदी कविता – ज़िशान आलम दुश्मन अपने ही निकले, शिकायत किस्से…
पुराने ताल्लुक़ – रिश्तों पर हिंदी कविता – ज़िशान आलम पुराने ताल्लुक़ को ऐसे ही नहीं तोड़ा जात…
आज वो हमें जंग के कुछ आदाब सिखाते हैं, मगर हम मोहब्बत में नज़रअंदाज़ कर जाते हैं। हमारी ख़ामो…