یوں در بدر کب تک رہوں ZISHAN ALAM URDU POETRY
یوں در بدر کب تک رہوں، سوچا کہیں آباد ہو…
یوں در بدر کب تک رہوں، سوچا کہیں آباد ہو…
لبوں پر تیرا نام رکھا ہے، یا رب، تُو نے مجھے سنبھال رکھا ہے۔ شروع کرتا ہوں تیرا نام لے کر، تُو…
अगर आप दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी और दर्द भरी कविताएँ पढ़ना पसंद करते हैं, तो “दर बदर” कवि…
मेरी ज़िन्दगी की वाहिद कमाई था वो मुझे अकेला करके क्यों चला गया वो अभी तो उसने चलना भी नहीं …
बेशक हुकूमत भी तेरी कलम भी तेरे,अखबार भी तेरे अदालत भी तेरी,,गवाह भी तेरे सबूत भी तेरे,,सब के स…
किसी को पांव की जूती किसी को सिर पर बैठा लेते हैं ये दुनियां ऐसी ही हैं साहब यहां लोग चेहरे बदल …
गर्मी की तपती धूप हूं मैं, सर्दी की चांदनी रात हूं। दिन का सूरज हूं, ना निकलूं तो घर का अंधेरे ह…
मैं तो मुसाफ़िर हूं यहां थोड़ी देर चला जाऊंगा यहां के हालात देखकर मैं थोड़ा ठहर जाऊंगा कब कहां …
लबों पर सदा तेरा ज़िक्र और फ़िक़्र रखा हैं तेरे नबी को दरूद -ए -पाक में याद रखा हैं शुरू करता ह…
मझधार में फंसा हूं मेरी कश्ती को किनारे लगा दे मौला हर तरफ अंधेरा हैं,,, मुझे कोई रास्ता तो द…