तन्हा महल - TANHA MAHAL
मेरी ज़िंदगी की वाहिद कमाई था वो, मुझे अकेला करके क्यों चला गया वो। अभी तो उसने चलना भी नहीं स…
मेरी ज़िंदगी की वाहिद कमाई था वो, मुझे अकेला करके क्यों चला गया वो। अभी तो उसने चलना भी नहीं स…
किसी को पाँव की जूती, किसी को सिर पर बैठा लेते हैं, ये दुनिया ऐसी ही है साहब, यहाँ लोग चेहरे बदल…
सुबह-शाम ना जाने कितने फ़ोन बजते हैं, मगर आस तो बस तुम्हारे फ़ोन की ही रहती है। कई साल गुज़र गए,…
बेसुकून हूं मैं मेरे हक़ में कोई दुआ तो कर दीजिए सुकून मिल जाए मुझे कहीं ऐसी दुआ कर दीजिए घेर लि…
कभी कभी यूं ही ख़्याल आ जाता हैं तुम्हारा हँसते-हँसते यूं ही अश्क़ छलक जाता हैं हमारा बैठे बैठे …