मैं ज़ख़्म हूँ | Main Zakhm Hoon | ज़िशान आलम
मैं ज़ख़्म हूँ— वहाँ जाकर किससे मिलता, नमक से तर-ब-तर कपड़े वहाँ सबने पहने थे। हर चेहरे पर ए…
मैं ज़ख़्म हूँ— वहाँ जाकर किससे मिलता, नमक से तर-ब-तर कपड़े वहाँ सबने पहने थे। हर चेहरे पर ए…
मेरी ज़िंदगी की वाहिद कमाई था वो, मुझे अकेला करके क्यों चला गया वो। अभी तो उसने चलना भी नहीं स…
ऐ ख़ुदा, दे बता तूने ऐसा क्यों किया, तोड़ दी मेरी हस्ती, तोड़ दी मेरी बस्ती, साथ तूने माँ का जो …
जो साथ होगा वो छूट जाएगा बादल होगा वो बरस जाएगा दोस्ती होगी वो अधूरी रह जाएगी नफरत होगी वो प्या…