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जिम्मेदारियां - JIMMEDARIYAN

आखों में नींद बहुत है क्या करूं ज़रूरते है की सोने नही देती  चाहत है पल दो पल के सुकून की  जिम्मे…

लौटूंगा मैं LOTUNGA MAI

लौटूंगा मैं  एक दिन मेरा इंतज़ार करना  उमीदों का सूरज डूबने मत देना  बहुत सी उलझनों में उलझा हूं …

पहली मोहब्बत - PEHLI MOHBBAT

नई मोहब्बत में नया काम कर के देखते हैं तुम्हारे वास्ते एक बार बदनाम  होकर देखते हैं सुना हैं तुम…

मेहंदी का रंग - MEHNDI KA RANG

पहले उसके हाथों को मेहंदी से सजाया होगा  तब कही जा के उसे लाल जोड़ा पहनाया होगा  पूछना यह हैं खुद…

झगडा - JHAGDA

झगड़ा सिर्फ सोच का हैं दूर जाने की बात नही  मेरे बस की बात नही उसके बस की बात नही  सारे रिश्ते तो…

खुशियों का ख़्याल / khushiyon ka khyal

वादा हैं अपना साथ निभाऊंगा  छोडकर तुम्हें कहीं नही जाऊंगा  बेखबर नही मैं खबरदार रहूँगा  तुम्हारी…

तल्खियाँ

मौका मिला तो कभी लिखूंगा तुम्हारे लहजे  कि भी तल्खियाँ  जो लफ्ज़ तुमने इस्तेमाल करे थे मेरे हक मे…

लफ़्ज़ों से अन बन /lafzon se an ban

लफ़्ज़ों से अन बन हैं  कलम  भी उखड़ा उखड़ा सा हैं  लफ़्ज़ों कि ख़ामोशी कलम कि बेरुखी कि वजह क्या हैं  ल…

धूल नफ़रत की DHOOL NAFRAT KI

धूल नफ़रत की चारो तरफ फ़ैल चुकी हैं जितनी बटनी थी ये ज़मी बट चुकी हैं ज़हर घोल दिया गया इन खुबसूरत…

ख़ामोश लड़की - KHAMOSH LADKI

आखों में चमक नही होठों पर लफ्ज़ नही  एहसासों से खाली है  ऐसा लगता है वो लड़की अब रोने वाली है  दे …

बेबसी - BEBASI

कभी ख़त कभी आवाज़ बनकर जाना जाना पड़ेगा  याद रहे एक दिन तुम्हे लौट कर आना पड़ेगा  बेबसी का आलम ये है…

सुखी हुई स्याही SUKHI HUE SYHAI

अभी कलम को हाथ ही लगाया था  स्याही सुखी हुई मिली कल ही तो लाया था  खुद को लिखने बैठा तो स्याही स…

इश्क़ का नशा - ISHQ KA NASHA

इश्क़ का नशा मुझ पर चढ़ता चला गया  मुझको बहलाया और मैं बहलता चला गया  दावे तो मोहब्बत के वो बहुत क…

किताब /Kitab

मैं वो क़िताब हूं जिसे अधूरा पढकर छोड़ दिया गया  हर बार की तरह शिकायत थी मुझे समझा न गया  I am the…

सिर्फ पन्ना क्यों /sirf panna kyu

सिर्फ पन्ना क्यों पूरी किताब बदल डालो  जो लिखे हैं अल्फ़ाज़ उन्हें खोद डालो  हर पन्ने पर तुम्हारा …

यूं ही / yu he

कभी कभी यूं ही ख़्याल आ जाता हैं तुम्हारा  हँसते-हँसते यूं ही अश्क़ छलक जाता हैं हमारा बैठे बैठे …

मैं अज़ीयत में हूं /Mai aziyat me hun

मैं अज़ीयत में हूँ अभी लिख नही पाउँगा  लिख भी दूं तो ज़्यादा नही लिख पाउँगा  ढल के आऊंगा किसी दिन…

एक सवाल - EK SAWAL

आज खुद को लिखकर चला गया वो ना जाने कहाँ खो गया वो  हर कोई दीवाना था  उसकी बेबाक़ दीवानगी का  हर क…

एक ख्याल तेरा - EK KHYAL TERA

अल्फ़ाज़ मेरे लिखने का अंदाज़ मेरा  सोच मेरी तुम्हे सोचने का हुनर मेरा  पन्ने मेरे कागज़ मेरा  किताब…

दागदार कागज़ DAGDAR KAGAZ

बहुत कुछ लिखने का मन हैं तुम्हारे लिए  लेकिन ख़ामोश आज अपने अल्फ़ाज़ हैं  कलम तो हुकुम का पाबंद हैं…

राह का मुसाफ़िर - RAH KA MUSAFIR

खुद को लिखने बैठूं तो रात यूं ही गुज़र जाएगी  सुबह होने की आस में शाम यूं ही ढल जाएगी  बहुत से ग़म…

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