जिम्मेदारियां - JIMMEDARIYAN
आखों में नींद बहुत है क्या करूं ज़रूरते है की सोने नही देती चाहत है पल दो पल के सुकून की जिम्मे…
आखों में नींद बहुत है क्या करूं ज़रूरते है की सोने नही देती चाहत है पल दो पल के सुकून की जिम्मे…
लौटूंगा मैं एक दिन मेरा इंतज़ार करना उमीदों का सूरज डूबने मत देना बहुत सी उलझनों में उलझा हूं …
मेरे सुकून की वजह है एक मुस्कुराहट तेरी मेरे जिने का बहाना है बस एक चाहत तेरी मेरी हर ख़ुशी तेर…
नई मोहब्बत में नया काम कर के देखते हैं तुम्हारे वास्ते एक बार बदनाम होकर देखते हैं सुना हैं तुम…
पहले उसके हाथों को मेहंदी से सजाया होगा तब कही जा के उसे लाल जोड़ा पहनाया होगा पूछना यह हैं खुद…
झगड़ा सिर्फ सोच का हैं दूर जाने की बात नही मेरे बस की बात नही उसके बस की बात नही सारे रिश्ते तो…
वादा हैं अपना साथ निभाऊंगा छोडकर तुम्हें कहीं नही जाऊंगा बेखबर नही मैं खबरदार रहूँगा तुम्हारी…
मौका मिला तो कभी लिखूंगा तुम्हारे लहजे कि भी तल्खियाँ जो लफ्ज़ तुमने इस्तेमाल करे थे मेरे हक मे…
लफ़्ज़ों से अन बन हैं कलम भी उखड़ा उखड़ा सा हैं लफ़्ज़ों कि ख़ामोशी कलम कि बेरुखी कि वजह क्या हैं ल…
धूल नफ़रत की चारो तरफ फ़ैल चुकी हैं जितनी बटनी थी ये ज़मी बट चुकी हैं ज़हर घोल दिया गया इन खुबसूरत…
आखों में चमक नही होठों पर लफ्ज़ नही एहसासों से खाली है ऐसा लगता है वो लड़की अब रोने वाली है दे …
खाली पन्नो की शिकायत है हर पन्ने पर तुम्हारा ज़िक्र क्यों होता है कैसे समझाऊं कैसे बताऊँ इन नाद…
कभी ख़त कभी आवाज़ बनकर जाना जाना पड़ेगा याद रहे एक दिन तुम्हे लौट कर आना पड़ेगा बेबसी का आलम ये है…
अभी कलम को हाथ ही लगाया था स्याही सुखी हुई मिली कल ही तो लाया था खुद को लिखने बैठा तो स्याही स…
इश्क़ का नशा मुझ पर चढ़ता चला गया मुझको बहलाया और मैं बहलता चला गया दावे तो मोहब्बत के वो बहुत क…
मैं वो क़िताब हूं जिसे अधूरा पढकर छोड़ दिया गया हर बार की तरह शिकायत थी मुझे समझा न गया I am the…
सिर्फ पन्ना क्यों पूरी किताब बदल डालो जो लिखे हैं अल्फ़ाज़ उन्हें खोद डालो हर पन्ने पर तुम्हारा …
कभी कभी यूं ही ख़्याल आ जाता हैं तुम्हारा हँसते-हँसते यूं ही अश्क़ छलक जाता हैं हमारा बैठे बैठे …
मैं अज़ीयत में हूँ अभी लिख नही पाउँगा लिख भी दूं तो ज़्यादा नही लिख पाउँगा ढल के आऊंगा किसी दिन…
आज खुद को लिखकर चला गया वो ना जाने कहाँ खो गया वो हर कोई दीवाना था उसकी बेबाक़ दीवानगी का हर क…
अल्फ़ाज़ मेरे लिखने का अंदाज़ मेरा सोच मेरी तुम्हे सोचने का हुनर मेरा पन्ने मेरे कागज़ मेरा किताब…
बहुत कुछ लिखने का मन हैं तुम्हारे लिए लेकिन ख़ामोश आज अपने अल्फ़ाज़ हैं कलम तो हुकुम का पाबंद हैं…
खुद को लिखने बैठूं तो रात यूं ही गुज़र जाएगी सुबह होने की आस में शाम यूं ही ढल जाएगी बहुत से ग़म…