इश्क़ क बाज़ार /Ishq ka bazar


कोई आकर बेच गया उसे इश्क़ के बाज़ार में 
खरीद लिया फिर से उसे किसी खरीदार ने 

सिलसिला यूं ही चलता रहा हर रोज़ बाज़ार में 
हसरत पूरी  हुई तो नीलाम कर गया उसे दरबार में 

फ़रेब देकर कोई छल गया उसे इश्क़ के बाज़ार में |

Someone came and sold it in the market of love
Bought it again by a buyer

The cycle continued like this every day in the market
When his wish was fulfilled, he was auctioned in the court.

Somebody cheated him in the market of love by deceiving him.

WRITE BY 
ZISHAN ALAM 

 

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