LAFZON KE MOUSAM ME

लश्कर — lashkar — ज़िशान आलम

लश्कर — रहबर और जिंदगी के रास्ते पर हिंदी कविता — ज़िशान आलम   वे लश्कर अक्सर हार जाते हैं, जो ब…

एखतेदार -- IKHTEDAR

ना दौलत ना शोहरत ना कोई एखतेदार चाहिए  मुझे तो बस यहां मेरे सदा होने का हक़ चाहिए  किसी खानदानी …

यूं ही / yu he

कभी कभी यूं ही ख़्याल आ जाता हैं तुम्हारा  हँसते-हँसते यूं ही अश्क़ छलक जाता हैं हमारा बैठे बैठे …

अपने अल्फ़ाज़ /Apne alfaaz

थोडा सा लिखा  हैं  पन्ना  लिखना अभी बाक़ी हैं ज़िंदगी हैं यारों  किताब  लिखना अभी बाक़ी हैं पढ़ च…

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