LAFZON KE MOUSAM ME

एखतेदार -- IKHTEDAR

ना दौलत ना शोहरत ना कोई एखतेदार चाहिए  मुझे तो बस यहां मेरे सदा होने का हक़ चाहिए  किसी खानदानी …

यूं ही / yu he

कभी कभी यूं ही ख़्याल आ जाता हैं तुम्हारा  हँसते-हँसते यूं ही अश्क़ छलक जाता हैं हमारा बैठे बैठे …

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