जंग के आदाब | Jung Ke Adaab | ज़िशान आलम
आज वो हमें जंग के कुछ आदाब सिखाते हैं, मगर हम मोहब्बत में नज़रअंदाज़ कर जाते हैं। हमारी ख़ामो…
आज वो हमें जंग के कुछ आदाब सिखाते हैं, मगर हम मोहब्बत में नज़रअंदाज़ कर जाते हैं। हमारी ख़ामो…
मैं ज़ख़्म हूँ— वहाँ जाकर किससे मिलता, नमक से तर-ब-तर कपड़े वहाँ सबने पहने थे। हर चेहरे पर ए…
لبوں پر تیرا نام رکھا ہے، یا رب، تُو نے مجھے سنبھال رکھا ہے۔ شروع کرتا ہوں تیرا نام لے کر، تُو ن…
मेरा भारत महान बेशक, मेरा भारत महान है। जितनी खुशी मुझे यह बताते हुए महसूस होती है कि मैं मुस्लि…
मैं मुसलमान हूँ, मैं अनपढ़ हूँ। मेरे अनपढ़ होने की सिर्फ़ दो वजहें हैं—पहली, मेरे माँ-बाप की म…
एक अजीब से मोड़ पर खड़ा हूँ, दिल में बहुत कुछ है, मगर कह नहीं पाता हूँ। तुम ख़ूबसूरत हो या …
तेरी यादों में एक याद हूँ, तेरी इबादत की एक फ़रियाद हूँ। उठते थे हाथ जब-जब हिज्र में तेरे, ल…
जो साथ होगा वो छूट जाएगा बादल होगा वो बरस जाएगा दोस्ती होगी वो अधूरी रह जाएगी नफरत होगी वो प्या…