निकल जाता हैं वो दिन का सवेरा पैसा रात का अँधेरा पैसा कमाने के लिए उसके पा…
मुझे अब घर जाना हैं सांझ ढलने को आई हैं घर से बुलावा आया हैं माँ ने आवाज लगाई …
कभी हँसता हूं कभी रो पड़ता हूं जब जब मैं अपने माज़ी में झाकता हूं माज़ी की भी अप…
कुछ कहना चाहता हूं आपसे मगर कुछ कह नही पाता इत्तेफ़ाक से क्योंकि लफ्ज़ अभी अध…
यार बहुत थक गया हूं मैं हर रोज़ भागते भागते अब सुकून चाहता हूं बस इक इतनी सी आ…
लबों से लफ्ज़ ना झड़े मगर आखों मे नमी पनपती हैं दिन भर की खामोशी सहकर बस अंदर …
.गुजरी है जो मुझ पर वो सिर्फ मै जानता हूँ मै आज भी उनको अपना मानता हूँ मै अक्…
समझता हूं तुमसे दूर हूं मगर तुम्हारे दिल के बहुत पास हूं जानता हूं इश्क की राह …
एक खौफ है जो दिल में बस चुका है एक डर है जो मुझे लग चुका है अक्सर सहम जात…
जब कभी माज़ी का किस्सा याद आ जाए …
लबों पर तेरा नाम रखा हैं या रब तूने मुझे संभाल रखा हैं शुरू करता हूं तेरा न…
मैं खुश था मैंने तुमको चुना था हां वो बात और थी तुमने किसी और को चुना था म…
मुझे अच्छा लगता हैं तुमसे ढेर सारी बाते करते रहना मुझे अच्छा लगता हैं तुम्हारी…
वो चाहत थी मै उसका अहसास भी नही था समझ तो रहे थे मगर बोलने का इरादा नही था…
चले आओ । हम सब कुछ भुला देगें अगर तुम चाहो तो पढ़ लेना हमारी आँखों का हर हर्फ़…
माज़ी के किस्से की तरह बीती रात के ख़्वाबों की तरह मेरा यार भी बदल गया है हू…




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