कह गए थे वे अब नही आएंगे
कोई मुझे बताए क्यों नही आएंगे
आसमां साफ़ हैं तो क्या बादल आएंगे
तो बताओ अब्र बरसने क्यों नही जाएंगे
ये हवाए ये घटाए महज़ आरजी हैं
लेकिन सितारे रत में मुस्तकिल जगमगाएंगे
ये रात अंधेरी हैं तो होने दो हमे क्या
कल सुबह नया सवेरा हम अपना उगाएंगे
वे जा रहे हैं तो जाने दो मत रोको
आज रात जश्न हम खुद तन्हा मनाएंगे |
write by
zishan alam



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