सुना सुना सा हैं आंगन मेरा /Suna suna sa hai aangan mera

  

कोई खता मुझ से हुई हैं तो बता 
लेकिन ऐसे रूठ कर ना जा 
रूठ कर तेरा जाना 
नही गए करके कोई फ़साना 
देख मायूस हैं तेरा दीवाना 
लौट आ लौट आ करके कोई बहाना 
क्योंकि तुम भी अधूरा  सा मैं 
और सुना सुना सा हैं आँगन मेरा |

WRITE BY 
ZISHAN ALAM

 

The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

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