नेमत-NEMAT



तेरी इस मोहब्बत को  मैं हमेशा यादों में रखूंगा
तेरी हर  एक  ख़ुशबू को  मैं  सहेज  कर रखूंगा 
मेरी हर  एक सांस  में  कर्ज़ हैं  तेरा मक़रूज़ हूं 
तूने बख़्शी हैं मुझे जो नेमत  संभालकर  रखूंगा

तेरी  इन  चाहतों  का मैं हर  रोज शुक्र गुजार हूं 
तेरी  इन मेहरबानियों का मैं हर रोज कर्ज़दार हूं 
मेरी  ज़िंदगी की ख़ुशी की वज़ह को याद रखूंगा
तूने  बख़्शी हैं मुझे जो नेमत  संभालकर  रखूंगा

तेरी  मेरी  मोहब्बत की एक नई कहानी लिखूंगा
हर  एक शख़्श  की  मैं  ऐसी  मुज़बानी  लिखूंगा
तेरी इस मुस्कान की धुन पर सबको सुनाता रहूंगा
तूने  बख़्शी  हैं मुझे  जो नेमत  संभालकर  रखूंगा

ज़िंदगी  के हसीन  सफ़र  में तेरे संग चलता रहूं मैं 
हंसता गुनगुनाता हमेशा तेरी यादों में खोया रहूं मैं
तेरी मोहब्बत की ख़ुशबू से हमेशा महकता रहूंगा 
तूने  बख़्शी  हैं   मुझे  जो नेमत  संभालकर  रखूंगा



WRITE BY ZISHAN ALAM

The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

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