तेरी इबादत की एक फरियाद हूं
उठते थे हाथ जब जब हिज़्र में तेरे
लबों से तेरे जो छलक जाता वो नाम हूं
वो मैं हूं वो मैं हूं ।
खुशी से कटती रहेगी तुम्हारी दिन और रातें
जो काट ना सकोगे वो रात हूं
वो में हूं वो में हूं ।
होगी गुफ्तगू तुम्हारी कई दफा लोगो से
जो दिल पर लगेगी वो बात हूं
वो मैं हूं वो मैं हूं
आखों से आसूं तुम्हारे बहते रहेंगे
जो संभाल ना पाओगे वो जज़्बात हूं
वो मैं हूं वो मैं हूं
भीड़ में जब जब तन्हा खुद को पाओगे
अपने पन का जो एहसास करा दे वो साथ हूं
वो मैं हूं वो मैं हूं।
बिताए होंगे कई हसीन पल तुमने दुनिया के साथ
जो भुला नही पाओगे वो याद हूं ।
वो मैं हूं वो मैं हूं
💕💕Spaicel thanks💕💕
Write by ✎✎ zishan alam
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एक लेखक होने के नाते हम शुक्रिया अदा करना चाहते हैं
zishan alam ji का जिन्होंने अपने खूबसूरत लफ्जों से इन लाइनों को सजाया हैं
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