मरकज़ी किरदार -MARKAZI KIRDAR

                                                                   


                                                              स्याही मेरी कलम मेरा हैं 

मानता हूं सब कुछ मेरा हैं 
लेकिन मेरी कहानी में मरकज़ी किरदार तो तुम्हारा हैं 
तुम ना होते तो ये लफ़्ज़ों का खज़ाना 
जो तुम पर लुटाए जा रहा हूं 
ये खाली खाली पन्ने
 जिन पर तुम्हे लिखता जा रहा हूं 
ये कलम ये स्याही
 कभी तुम्हे लिखने की तमन्ना ना करते 
ये इश्क़ ही हैं अगर इश्क़ नही तो क्या हैं 
जो इस पार भी हैं उस पार भी हैं 
इस पार का इश्क़ लाहमादूद हैं 
उस पार का इश्क़ अभी हुदूद में हैं |

 
Write ✎✎ by Zishan alam  



The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने