स्याही मेरी कलम मेरा हैं
मानता हूं सब कुछ मेरा हैं
लेकिन मेरी कहानी में मरकज़ी किरदार तो तुम्हारा हैं
तुम ना होते तो ये लफ़्ज़ों का खज़ाना
जो तुम पर लुटाए जा रहा हूं
ये खाली खाली पन्ने
जिन पर तुम्हे लिखता जा रहा हूं
ये कलम ये स्याही
कभी तुम्हे लिखने की तमन्ना ना करते
ये इश्क़ ही हैं अगर इश्क़ नही तो क्या हैं
जो इस पार भी हैं उस पार भी हैं
इस पार का इश्क़ लाहमादूद हैं
उस पार का इश्क़ अभी हुदूद में हैं |
Write ✎✎ by Zishan alam
