यार मेरा क्यों बदल गया बिन बादलों के जैसा क्यों बरस गया कहता था यार मेरा याराना है अपना पुराना अव्वल रंग है मेरा फिर क्यों अनेक रंगों ...
वो गरीब बच्चा था /wo gareeb baccha tha
वो गरीब बच्चा था हालात का सताया हुआ था जाने वो कौन सी कैसी सी जिम्मेदारी थी जो आन पड़ी थी उसके नाज़ुक नाज़ुक कंधों पर जिसको वो अपने अरमा...
वो गरीब बच्चा था /wo gareeb baccha tha
Reviewed by The zishan's view
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दिसंबर 26, 2020
Rating: 5
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दिसंबर 26, 2020
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आज कुछ कहने का मन हैं /aaj kuch khane ka man hai
सुनों आज कुछ कहने का मन हैं जैसे झरने की तरह बहने का मन हैं समझ नही आता हर लम्हे तुम्हे महसूस करूं या गीत गजलों की तरह गुनगुनाता फिरूं ब...
आज कुछ कहने का मन हैं /aaj kuch khane ka man hai
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