मेरे लफ़्ज़ों को थोड़ा समझ कर तो देखो अपने आप समझ जाओगे की तरह सामने से मेरे गुज़रते हो जब भी कभी यू ना मुँह मोड़ा करो तुम अजनबी की तरह मे...
अक्षर अक्षर चुम कर अपना लेता हूं - AKSHAR AKSHR CHUM KAR
बनकर वो शोला मरहम में बदल जाता है कुछ अंदाज़ नया तो कुछ पुराना होता है राहों में पत्थर तेरे बने जो रुकावट उसको किनार देता हूं अ...
अक्षर अक्षर चुम कर अपना लेता हूं - AKSHAR AKSHR CHUM KAR
Reviewed by The zishan's view
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दिसंबर 10, 2019
Rating: 5
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