कुछ तो टूटा-टूटा सा है उम्मीदें, ख़्वाहिशें,या फिर मैं उम्मीदों पर तो खरा उतरा…
बिखरे बिखरे से अल्फाज़ हैं टूटे टूटे से हम पता नही क्या हुआ क्यों हुआ खामोश ह…
हम तो तन्हा थे बस लिखते चले गए गम खाकर फिर भी मुस्कुराते चले गए एक वीरान से कम…
सोचता हूं थोडा सा कहीं ठहर जाऊं मैं या चलते -चलते कहीं रुक जाऊं मैं …
ये ज़ख्म अब भर क्यों नही जाता जो बीत गया वो भुला क्यों नही जाता हर वक़्त क्यों …
आखों में नींद बहुत है क्या करूं ज़रूरते है की सोने नही देती चाहत है पल दो पल के…
लौटूंगा मैं एक दिन मेरा इंतज़ार करना उमीदों का सूरज डूबने मत देना बहुत सी उलझ…
मेरे सुकून की वजह है एक मुस्कुराहट तेरी मेरे जिने का बहाना है बस एक चाहत तेरी …
नई मोहब्बत में नया काम कर के देखते हैं तुम्हारे वास्ते एक बार बदनाम होकर देखते…
पहले उसके हाथों को मेहंदी से सजाया होगा तब कही जा के उसे लाल जोड़ा पहनाया होगा …
झगड़ा सिर्फ सोच का हैं दूर जाने की बात नही मेरे बस की बात नही उसके बस की बात नह…
वादा हैं अपना साथ निभाऊंगा छोडकर तुम्हें कहीं नही जाऊंगा बेखबर नही मैं खबरदार…
मौका मिला तो कभी लिखूंगा तुम्हारे लहजे कि भी तल्खियाँ जो लफ्ज़ तुमने इस्तेमाल …
लफ़्ज़ों से अन बन हैं कलम भी उखड़ा उखड़ा सा हैं लफ़्ज़ों कि ख़ामोशी कलम कि बेरुखी क…
धूल नफ़रत की चारो तरफ फ़ैल चुकी हैं जितनी बटनी थी ये ज़मी बट चुकी हैं ज़हर घोल दि…
आखों में चमक नही होठों पर लफ्ज़ नही एहसासों से खाली है ऐसा लगता है वो लड़की अब …
खाली पन्नो की शिकायत है हर पन्ने पर तुम्हारा ज़िक्र क्यों होता है कैसे समझाऊं …
कभी ख़त कभी आवाज़ बनकर जाना जाना पड़ेगा याद रहे एक दिन तुम्हे लौट कर आना पड़ेगा ब…
अभी कलम को हाथ ही लगाया था स्याही सुखी हुई मिली कल ही तो लाया था खुद को लिखने…
इश्क़ का नशा मुझ पर चढ़ता चला गया मुझको बहलाया और मैं बहलता चला गया दावे तो मोह…
मैं वो क़िताब हूं जिसे अधूरा पढकर छोड़ दिया गया हर बार की तरह शिकायत थी मुझे समझ…
सिर्फ पन्ना क्यों पूरी किताब बदल डालो जो लिखे हैं अल्फ़ाज़ उन्हें खोद डालो हर प…
कभी कभी यूं ही ख़्याल आ जाता हैं तुम्हारा हँसते-हँसते यूं ही अश्क़ छलक जाता हैं…
मैं अज़ीयत में हूँ अभी लिख नही पाउँगा लिख भी दूं तो ज़्यादा नही लिख पाउँगा ढल …




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