कभी दिन ढलें तो कभी शाम लिखता हैं हर रोज़ एक नई पहचान लिखता हैं कभी सुबह तो कभी …
महफ़िल में ख़ामोश देखकर तुझे अजीब सा लग गया सब वाह -वाह कर रहे थे बस एक तू ख़ामोश…
किसी ने मुझसे कहा बड़ी गहराई से सोचते हो जनाब मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दे दिया…
अपने वजूद का एक हिस्सा खुद से कैसे जुदा कर देता तुम्हे जाना था तुम चले गए मेर…
कोई पास नही आया था मुझे रोता हुआ देखकर अपने भी किनारा कर गए थे मेरे हालात देखक…
सुनो तुम इतनी जल्दी गुस्सा ना हुआ करो जान मेरी ऐसा ना करा करो तुम्हारा गुस्स…
सच बताए तो तेरी आखों में डूबते चले गए हम कैसे संभालते खुद को बस फिसलते चले गए ह…
मेरे ज़ख़्म भरते -भरते उम्र यूं ही गुज़र जाएगी ज़िंदगी का क्या भरोसा कब रुक जाएगी …
मैं टूट गया तो मेरा तेरा क्या जाएगा सामने दीवार पर लगे आईने से पूछ उसका क्या …
बेशक़ सफ़र मेरा बहुत तवील हैं लेकिन मेरी ग़ुरबत देखकर अपना रास्ता मत बदल लेना मैं…
मैं चाहता हूं वो मुझे इस तरह मिलें कही दूर नीम की छाव तले मुस्कुराती हुई वो म…
तेरी यादों का सिला हैं तेरे वादों का सिला हैं जो मुझे मिला हैं वो तेरी अनकही बा…
सोचता हूं आज क्या लिखूं किसी के आखों के छलकते आसूं लिखूं या किसी के होठों …
कितना अजीब सा रिश्ता था हमारा या यूं कहूँ कोई अधूरा ख़्वाब था रिश्ता कहूँ या प…
लहज़े में उनके कुछ नया अंदाज़ आया हैं लगता हैं उन्हें मेरा फिर से ख़्याल आया हैं…
ए खुदा दे बता तूने ऐसा क्यों किया तोड़ दी मेरी हस्ती तोड़ दी मेरी बस्ती साथ तून…
बाबा मुझ पर ऐसा जुल्म ना कर मैं भी तेरा ही साया हूं ये खता तू मुझ पर ना कर ब…
आखों से अश्क़ छलका कर तेरे लिए हिज़्र में हाथ उठाते हैं धरती पर सज्दा कर अम्बर …
तेरा वजूद मेर लिए इतने मायने रखता हैं मेरे वीरान से ख़्वाबों को चमका देता हैं आ…
ये उलझने सुलझती क्यों नही ये ख़ामोशी टूटती क्यों नही धूप सिरहाने को हैं सूरज …
विरासत में नही मिला मुझे ये हुनर एक एक अल्फाज़ चुम कर लाया हूं खानदानी नह…
थोडा सा लिखा हैं पन्ना लिखना अभी बाक़ी हैं ज़िंदगी हैं यारों किताब लिखना अ…
कोई आकर बेच गया उसे इश्क़ के बाज़ार में खरीद लिया फिर से उसे किसी खरीदार ने …
मैं माज़ी के बारे में ज़्यादा नही सोचता क्योंकि यह मेरी आखों में आसूं ले आता ह…
सोचता हूं माज़ी की किताब को फिर से खोल लूं जो लिखे थे कुछ अल्फाज़ उनकी याद मे…
रिश्ते मुझे हर तरह से निभाने आते हैं टूटते रिश्तों को मुझे बचाने आते हैं टू…
ये बारिश की बूंदे मुझ से कुछ कहती हैं मुझे अपने पास बुलाती हैं ऐसा लगता हैं म…
वे चाहतें है लिखना छोड़ दूं मै बहतें दरिया का रुख मोड़ दूं मै कैसे बताऊँ उन ना…




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