हम याद रखेंगे बेशक याद रखेंगे ये तमाशा जो तुमने लगा रखा हैं नफरत की आग को जो इ…
हिज़रत के नाम पे ज़िन्दगी नही गुज़ारेगें हम भला अपना वतन छोड़कर क्यों जाएगे हम खट…
झूठ के बाज़ार में सच बोलना मुश्किल हो गया अब तो आवाज़ उठाना भी ज़ुल्म हो गया हर…
मेरे गाँव की मिट्टी मुझे अच्छी लगती हैं इस मिट्टी की खुशबु मुझे अच्छी लगती हैं…
मुझे बे सुकून कर के चला गया चेहरे पर उदासी आखों में नमी छोड़ गया ये तुमने कैसी…
हमारी बेबसी तो देखिए हम उन्हें अपना कहते हैं हम मोहब्बत करते हैं उनसे वो हमें …
चलो खुशियों के माहौल में कुछ अल्फाज़ लिखें अपने अल्फाज़ों में महज़ तुम्हे लिखें …
कुछ तो टूटा-टूटा सा है उम्मीदें, ख़्वाहिशें,या फिर मैं उम्मीदों पर तो खरा उतरा…
बिखरे बिखरे से अल्फाज़ हैं टूटे टूटे से हम पता नही क्या हुआ क्यों हुआ खामोश ह…
हम तो तन्हा थे बस लिखते चले गए गम खाकर फिर भी मुस्कुराते चले गए एक वीरान से कम…
सोचता हूं थोडा सा कहीं ठहर जाऊं मैं या चलते -चलते कहीं रुक जाऊं मैं …
ये ज़ख्म अब भर क्यों नही जाता जो बीत गया वो भुला क्यों नही जाता हर वक़्त क्यों …
आखों में नींद बहुत है क्या करूं ज़रूरते है की सोने नही देती चाहत है पल दो पल के…
लौटूंगा मैं एक दिन मेरा इंतज़ार करना उमीदों का सूरज डूबने मत देना बहुत सी उलझ…
मेरे सुकून की वजह है एक मुस्कुराहट तेरी मेरे जिने का बहाना है बस एक चाहत तेरी …
नई मोहब्बत में नया काम कर के देखते हैं तुम्हारे वास्ते एक बार बदनाम होकर देखते…
पहले उसके हाथों को मेहंदी से सजाया होगा तब कही जा के उसे लाल जोड़ा पहनाया होगा …
झगड़ा सिर्फ सोच का हैं दूर जाने की बात नही मेरे बस की बात नही उसके बस की बात नह…
वादा हैं अपना साथ निभाऊंगा छोडकर तुम्हें कहीं नही जाऊंगा बेखबर नही मैं खबरदार…
मौका मिला तो कभी लिखूंगा तुम्हारे लहजे कि भी तल्खियाँ जो लफ्ज़ तुमने इस्तेमाल …
लफ़्ज़ों से अन बन हैं कलम भी उखड़ा उखड़ा सा हैं लफ़्ज़ों कि ख़ामोशी कलम कि बेरुखी क…
धूल नफ़रत की चारो तरफ फ़ैल चुकी हैं जितनी बटनी थी ये ज़मी बट चुकी हैं ज़हर घोल दि…




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