आज के दौर की मरी हुई इंसानियत /Aaj k dour ki mari hui insaniyat

अक्टूबर 25, 2020
  एक खौफ  है जो दिल में  बस चुका है एक डर है जो मुझे लग चुका है   अक्सर सहम जाता हूँ में जब एक आवाज़ कानो तक पहुचती है  आज फिर किसी मासूम बच्...