झगड़ा सिर्फ सोच का हैं दूर जाने की बात नही मेरे बस की बात नही उसके बस की बात नह…
वादा हैं अपना साथ निभाऊंगा छोडकर तुम्हें कहीं नही जाऊंगा बेखबर नही मैं खबरदार…
मौका मिला तो कभी लिखूंगा तुम्हारे लहजे कि भी तल्खियाँ जो लफ्ज़ तुमने इस्तेमाल …
लफ़्ज़ों से अन बन हैं कलम भी उखड़ा उखड़ा सा हैं लफ़्ज़ों कि ख़ामोशी कलम कि बेरुखी क…
धूल नफ़रत की चारो तरफ फ़ैल चुकी हैं जितनी बटनी थी ये ज़मी बट चुकी हैं ज़हर घोल दि…
आखों में चमक नही होठों पर लफ्ज़ नही एहसासों से खाली है ऐसा लगता है वो लड़की अब …
खाली पन्नो की शिकायत है हर पन्ने पर तुम्हारा ज़िक्र क्यों होता है कैसे समझाऊं …
कभी ख़त कभी आवाज़ बनकर जाना जाना पड़ेगा याद रहे एक दिन तुम्हे लौट कर आना पड़ेगा ब…
अभी कलम को हाथ ही लगाया था स्याही सुखी हुई मिली कल ही तो लाया था खुद को लिखने…
इश्क़ का नशा मुझ पर चढ़ता चला गया मुझको बहलाया और मैं बहलता चला गया दावे तो मोह…
मैं वो क़िताब हूं जिसे अधूरा पढकर छोड़ दिया गया हर बार की तरह शिकायत थी मुझे समझ…
सिर्फ पन्ना क्यों पूरी किताब बदल डालो जो लिखे हैं अल्फ़ाज़ उन्हें खोद डालो हर प…
कभी कभी यूं ही ख़्याल आ जाता हैं तुम्हारा हँसते-हँसते यूं ही अश्क़ छलक जाता हैं…
मैं अज़ीयत में हूँ अभी लिख नही पाउँगा लिख भी दूं तो ज़्यादा नही लिख पाउँगा ढल …
आज खुद को लिखकर चला गया वो ना जाने कहाँ खो गया वो हर कोई दीवाना था उसकी बेबाक़ …
अल्फ़ाज़ मेरे लिखने का अंदाज़ मेरा सोच मेरी तुम्हे सोचने का हुनर मेरा पन्ने मेरे…
बहुत कुछ लिखने का मन हैं तुम्हारे लिए लेकिन ख़ामोश आज अपने अल्फ़ाज़ हैं कलम तो ह…
खुद को लिखने बैठूं तो रात यूं ही गुज़र जाएगी सुबह होने की आस में शाम यूं ही ढल …
कभी दिन ढलें तो कभी शाम लिखता हैं हर रोज़ एक नई पहचान लिखता हैं कभी सुबह तो कभी …
महफ़िल में ख़ामोश देखकर तुझे अजीब सा लग गया सब वाह -वाह कर रहे थे बस एक तू ख़ामोश…
किसी ने मुझसे कहा बड़ी गहराई से सोचते हो जनाब मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दे दिया…
अपने वजूद का एक हिस्सा खुद से कैसे जुदा कर देता तुम्हे जाना था तुम चले गए मेर…
कोई पास नही आया था मुझे रोता हुआ देखकर अपने भी किनारा कर गए थे मेरे हालात देखक…
सुनो तुम इतनी जल्दी गुस्सा ना हुआ करो जान मेरी ऐसा ना करा करो तुम्हारा गुस्स…




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