ना जाने क्यों मन करता असदुद्दीन ओवैसी



ना जाने क्यों मन करता उसके जैसा बनने को
जैसा दुनिया कहती है उसके जैसा बनने को
पहन के शेरवानी जब वो शान से चलता है
रख कर टोपी सर पर जब संसद में गरजता है
ना पकड़ में आता है
ना समझ में आता है
असदुद्दीन ओवैसी के नाम से जाना जाता है

 ना जाने क्यों मन करता उसके जैसा बनने को
ना किसी संघी का डर ना नारंगी खटमल का
ज्यादातर सफर करता पैदल का
ना डर ना भय किसी बात का
साया है उसके साथ पाक परवरदिगार का

ना जाने क्यों मन करता उसके जैसा बनने को
हुकूमत की आँख से आँख मिलने वाला
बडे बुज़ुर्गों की इज़्ज़त करने वाला
मजलूमों की आवाज़ सदा उठाने वाला
हक़ बात को निडर होकर बोलने वाला
कोई दीवाना कहता है
कोई मस्ताना समझता है
हर कोई उसके रंग में ढल जाना चाहता है
फिर भी ये आलम कहता है
ना जाने क्यों मन करता उसके जैसा बनने को
जैसा दुनिया कहती है उसके जैसा बनने को
Written by
zishan alam zisshu

The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

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