किरदार .. kirdar


 


मेरी कहानी में तेरा कोई किरदार ना रहे 
मैं तो बदनाम हूं बहुत मगर तू दागदार ना रहे 

दुआ हैं किसी मोड़ पे ना हो कोई मुलाक़ात 
याद करूं मैं तुम्हे लेकिन कोई यादगार ना रहे 

कभी मुश्किल में आवाज़ दूँ तो मत आना मेरे पास 
मदद मांगूं मैं किसी और से तू मेरा मददगार ना रहे 

मुलाक़ात कर लेता हूँ ख़्वाबों में अभी थोडा मजबूर हूं
मुझे तलब हैं तेरी लेकिन तू मेरी तलबगार ना रहे 

दुनिया की नज़रों से बचाकर रखा हैं अभी तक तुम्हे 
हटा दूँ ये पर्दा तो चेहरा तेरा फिर रंगदार ना रहे |






write by zishan alam 

The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

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