आज के दौर की मरी हुई इंसानियत /Aaj k dour ki mari hui insaniyat

अक्टूबर 25, 2020
  एक खौफ  है जो दिल में  बस चुका है एक डर है जो मुझे लग चुका है   अक्सर सहम जाता हूँ में जब एक आवाज़ कानो तक पहुचती है  आज फिर किसी मासूम बच्...

या रब तूने मुझे संभाल रखा हैं (YA rab tune mujhe sambhal rkha hai )

अक्टूबर 18, 2020
  लबों पर तेरा नाम रखा हैं  या रब तूने मुझे संभाल रखा हैं  शुरू करता हूं तेरा नाम लेकर  तूने मुझे हर बला से बचा रखा हैं  या रब तूने मुझे संभ...

मै खुश था /MAI KHUSH THA

अक्टूबर 16, 2020
  मैं खुश था  मैंने तुमको चुना था  हां वो बात और थी  तुमने किसी और को चुना था मानता हूं सिलसिला चाहत का एक तरफा था लेकिन प्यार था मगर इशारों...

चाहत(chahat)

अक्टूबर 12, 2020
  वो चाहत थी  मै उसका अहसास भी नही था  समझ तो रहे थे  मगर बोलने का इरादा नही था  मै उस बंद किताब की तरह था  जिसे पढ़ना तुम्हारे वश में नही था...

चले आओ (chale aao )

अक्टूबर 10, 2020
  चले आओ । हम सब कुछ भुला देगें अगर तुम चाहो तो  पढ़ लेना हमारी आँखों का हर हर्फ़ ना मिलेंगी शिकायत तुमको ना मिलेगा शिकवा  ना मिलेंगी रंजिशें ...

अरमान (Arman )

सितंबर 29, 2020
  जब जब तुझको देख लेता हूं  किसी और कि बाहों में कितने अरमान निकल आते है मेरे मन के आंगन में  एक अक्षर  लिखता था तेरी पलको पर  दूसरा अक्षर ल...

नम आँखे (Nam aakhen )

सितंबर 29, 2020
      हर बार नम हुई हमारी आंखे हर बार याद आई तुम्हारी यादें  हम खुद को कितना समझाए हर बार रुलाती है तुम्हारी यादें  हर दिन यही लगता है  कल उ...