यार मेरा क्यों बदल गया बिन बादलों के जैसा क्यों बरस गया कहता था यार मेरा याराना है अपना पुराना अव्वल रंग है मेरा फिर क्यों अनेक रंगों ...
वो गरीब बच्चा था /wo gareeb baccha tha
वो गरीब बच्चा था हालात का सताया हुआ था जाने वो कौन सी कैसी सी जिम्मेदारी थी जो आन पड़ी थी उसके नाज़ुक नाज़ुक कंधों पर जिसको वो अपने अरमा...
वो गरीब बच्चा था /wo gareeb baccha tha
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दिसंबर 26, 2020
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दिसंबर 26, 2020
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आज कुछ कहने का मन हैं /aaj kuch khane ka man hai
सुनों आज कुछ कहने का मन हैं जैसे झरने की तरह बहने का मन हैं समझ नही आता हर लम्हे तुम्हे महसूस करूं या गीत गजलों की तरह गुनगुनाता फिरूं ब...
आज कुछ कहने का मन हैं /aaj kuch khane ka man hai
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दिसंबर 26, 2020
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गुज़ारिश/Guzarish
फुरसत के कुछ पल दे अपने मुझे आ बैठ वक़्त निकालकर किसी शाम मेरे पास कुछ लफ्ज़ ऐसे हैं जो तेरे इंतज़ार में डेरा डाले बैठे हैं लफ़्ज़ों को...
गुज़ारिश/Guzarish
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दिसंबर 19, 2020
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अंधेरा हैं / Andhera hai
मेरे साथ चल पागल अंधेरा हैं अंधेरा तो अंधेरा हैं ना झूठी आस का सवेरा हैं ना रोशन ये जंगल हैं मैं हूं तुम हो और सुनसान जंगल हैं जंगल तो जं...
अंधेरा हैं / Andhera hai
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दिसंबर 15, 2020
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किसान हूं साहब मैं /Kisan hun sahab mai
किसान हूं साहब मैं अपना हक मांगने आया हूं मैं कोई आतंकी नही हूं मैं जो डर रहे हो किसान हूं साहब मैं मैं बड़ी दूर दूर से आया हूं अपनी फरि...
किसान हूं साहब मैं /Kisan hun sahab mai
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दिसंबर 06, 2020
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आबरू का पहरेदार -- AABRU KA PEHREDAR
गहना इज्ज़त का तुम्हारी हमेशा आखों पर रखूंगा पर्दा लिबास का कभी हटने नही दूंगा खुदगर्ज़ नही हूँ मै खुद्दार रहूंगा तुम्हारी आबरू का पहरेदा...
आबरू का पहरेदार -- AABRU KA PEHREDAR
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दिसंबर 01, 2020
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दिसंबर 01, 2020
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मैं धर्म नही इंसान हूं / mai dharm nhi insan hun
मैं धर्म नही इंसान हूं किसी के घर का जलता हुआ चिराग हूं मत बुझाओ मुझे सियासी नफ़रत के खातिर मैं अपने घर का महकता हुआ गुलदान हूं मैं धर्म न...
मैं धर्म नही इंसान हूं / mai dharm nhi insan hun
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नवंबर 29, 2020
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नींद कहाँ है /Neend khan hai
निकल जाता हैं वो दिन का सवेरा पैसा रात का अँधेरा पैसा कमाने के लिए उसके पास हैं पैसा बंगला गाड़ी इज्ज़त शोहरत लेकिन सुकून कहाँ हैं पूरे...
नींद कहाँ है /Neend khan hai
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नवंबर 29, 2020
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मुझे अब घर जाना हैं /mujhe ab ghar jana hai
मुझे अब घर जाना हैं सांझ ढलने को आई हैं घर से बुलावा आया हैं माँ ने आवाज लगाई हैं थक गया हूं मैं हर रोज़ की भाग दौड़ से गुम हो गया हूं प्रद...
मुझे अब घर जाना हैं /mujhe ab ghar jana hai
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नवंबर 28, 2020
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माज़ी की कहानी /mazi ki khani
कभी हँसता हूं कभी रो पड़ता हूं जब जब मैं अपने माज़ी में झाकता हूं माज़ी की भी अपनी एक कहानी हैं नही मालूम किसको सुनानी हैं क्योंकि यहाँ हर क...
माज़ी की कहानी /mazi ki khani
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नवंबर 25, 2020
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नवंबर 25, 2020
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कुछ कहना चाहता हूँ /kuch khana chahta hun
कुछ कहना चाहता हूं आपसे मगर कुछ कह नही पाता इत्तेफ़ाक से क्योंकि लफ्ज़ अभी अधूरे हैं लेकिन जज़्बात पूरे हैं सुन लो ना तुम मेरे दिल की आवाज़...
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नवंबर 15, 2020
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यार बहुत थक गया हूं मैं /Yar bahut thak gya hun me
यार बहुत थक गया हूं मैं हर रोज़ भागते भागते अब सुकून चाहता हूं बस इक इतनी सी आरजू हैं अब जी भर के सोना चाहता हैं ना मंज़िल हैं कोई ना मंजिल...
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नवंबर 12, 2020
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इक मासूम सी पगली /ek masoom se pagli
लबों से लफ्ज़ ना झड़े मगर आखों मे नमी पनपती हैं दिन भर की खामोशी सहकर बस अंदर ही अंदर ही बरसती हैं इक मासूम सी पगली बात करने के लिए बहुत त...
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नवंबर 01, 2020
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मै जानता हूँ मै मानता हूँ /mai janta hun mai manta hun
.गुजरी है जो मुझ पर वो सिर्फ मै जानता हूँ मै आज भी उनको अपना मानता हूँ मै अक्सर खोया रहता हूँ अपने आप मै मगर फिर भी मै उनकी खवाहिशों को ज...
मै जानता हूँ मै मानता हूँ /mai janta hun mai manta hun
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नवंबर 01, 2020
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मैं हूँ ना /MAI HOON NA
समझता हूं तुमसे दूर हूं मगर तुम्हारे दिल के बहुत पास हूं जानता हूं इश्क की राह में रुकावटे अव्वल दर्जे पर हैं मगर तुम बेखौफ होकर चलते रहना ...
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नवंबर 01, 2020
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नवंबर 01, 2020
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आज के दौर की मरी हुई इंसानियत /Aaj k dour ki mari hui insaniyat
एक खौफ है जो दिल में बस चुका है एक डर है जो मुझे लग चुका है अक्सर सहम जाता हूँ में जब एक आवाज़ कानो तक पहुचती है आज फिर किसी मासूम बच्...
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अक्टूबर 25, 2020
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आवाज दे देना मुझे (Aawaj de dena mujhe )
जब कभी माज़ी का किस्सा याद आ जाए हो सके अश्क पलकों से छलक जाए ...
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अक्टूबर 19, 2020
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अक्टूबर 19, 2020
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