मैने मोहब्बत की -- MAINE MOHBBAT KI


मैंने तेरी रूह से मोहब्बत की
तेरे जिस्म की कभी चाहत ना की
मैंने तेरे एहसासों से मोहब्बत की
तू मेरे पास नही लेकिन फिर भी की

मैंने अपने बीते हुए कल से मोहब्बत की
क्योंकि उस कल में तू मेरी मोहब्बत थी
मैंने हर याद से मोहब्बत की
क्योंकि उन यादों में तू मेरी मोहब्बत थी 

मैंने उन लम्हो से मोहब्बत की
जिन लम्हो में हम दोनों की मोहब्बत थी 
मैंने उन अल्फ़ाज़ों से मोहब्बत की
जो महकते थे तेरी मोहब्बत  से 

मैंने उन जज़्बातों से मोहब्बत की
जिन बातों से आसूं निकलते थे तेरे

ना तुझ से कभी रुहबरु मिला।
ना कभी हूबहू तुझको देखा 
ऐसा लगता था बस एक ख़्वाब से
मोहब्बत की ।l
इसलिए तेरे  इंतज़ार से मोहब्बत की 

Written by zishan alam zisshu


The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

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