किसके ज़ख्म भरे यहां कौन घर जाएगा
देखना वो शख्स पलटकर वापस आएगा
अंधेरों से कह दो वो उजाले से ना टकराए
वरना फिर कौन यहां शमा जलाने आएगा
उसकी कागज़ की कश्ती हैं तो क्या हुआ
डूबेगा तो खुद को साहिल तक ले आएगा
एक उम्मीद पर कायम हैं ये बे जोड रिश्ता
एक दिन बहुत एहतराम से जाना जाएगा
हादसे तो होते थे होते रहेंगे इसने नया क्या
सिकंदर तो वो हैं जो मंजिल तलक जाएगा
ज़ख्म हरे हैं भरे नहीं अभी तलक देखना ये हैं
कौन इन ज़ख्मों का मरहम लेकर आएगा
Write by ✎✎ zishan alam