लिखता रहूं/Likhta rhun

जनवरी 17, 2021
लिखता रहूं तुम्हे मैं जिंदगी भर  तुम वो ग़ज़ल बन जाओं  मैं छोटा सा लेखक तो तुम हर्फ़ बन जाओ  मैं कलम तो स्याही एहसासों की तुम बन जाओं  फ़र्क ह...

तेरे बगैर /Tere bagair

जनवरी 14, 2021
तेरे बगैर हम दुनिया को वीरान लिखेगें  तन्हा खुद को राहों को सुनसान लिखेंगे  वही लहजा वही जज़्बात वही कलाम लिखेंगे  एक खत और हम तेरे नाम लिख...

गुज़ारिश/Guzarish

दिसंबर 19, 2020
फुरसत के  कुछ पल दे  अपने मुझे  आ बैठ वक़्त निकालकर  किसी शाम मेरे पास  कुछ लफ्ज़ ऐसे हैं जो तेरे इंतज़ार में  डेरा डाले बैठे हैं  लफ़्ज़ों को...

अंधेरा हैं / Andhera hai

दिसंबर 15, 2020
मेरे साथ चल पागल अंधेरा हैं  अंधेरा तो अंधेरा हैं  ना झूठी आस का सवेरा हैं  ना रोशन ये जंगल हैं मैं हूं तुम हो और सुनसान जंगल हैं जंगल तो जं...

मैं हूँ ना /MAI HOON NA

नवंबर 01, 2020
समझता हूं तुमसे दूर हूं मगर तुम्हारे दिल के बहुत पास हूं जानता हूं इश्क की राह में रुकावटे अव्वल दर्जे पर हैं  मगर तुम बेखौफ होकर चलते रहना ...

आज के दौर की मरी हुई इंसानियत /Aaj k dour ki mari hui insaniyat

अक्टूबर 25, 2020
  एक खौफ  है जो दिल में  बस चुका है एक डर है जो मुझे लग चुका है   अक्सर सहम जाता हूँ में जब एक आवाज़ कानो तक पहुचती है  आज फिर किसी मासूम बच्...