जरूरी तो नही


अब ये जरूरी तो नही
 तू मेरी जिंदगी में नही ।
मेरी सासों में बसी है 
में तेरी नस नस में नही ।

हर कदम संभाल कर रख रहा था 
में उसी अंदाज में ।
कदम लड़खड़ा गया तेरा 
देख किसी औऱ अंदाज़ में ।

अब ये जरूरी तो नही 
तू मेरी जिंदगी में नही ।

Written by 
Zishan alam 

The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

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