काश KAASH



काश 
वो मेरी आवाज सुन पाती ।
कितनी आवाज़े मुझको डरती ।
जाने क्यों अपने पास बुलाती ।
पल पल याद उसकी तड़पाती ।
काश 
वो मेरे पास होती ।
खुशिया हज़ार दर पर होती ।
मुस्कुराया था उसके आने से ।
टूट कर बिखर गया उसके जाने से ।
कभी हल्की आवाज़ों से डर जाता ।
कभी भ्रम मे फस जाता ।
जब भी में आईने के सामने खड़ा हो जाता ।
खुद से कहते कहते क्यों डर जाता ।
काश
कोई मुझे समझ पाता।
लड़ता रहता हूं खुद से हर पल ।
चैन मुझे नही मिल पाती ।
क्यों मुझे ये दुनिया डराती।
किस्से कहू समझ नही आती ।
काश
वो मुझे सुन पाती ।

Written by
Zishan alam



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