पुरानी मोहब्बत


पुरानी मोहब्बत को नई 
अफवाहों से मत जोड़ो ।
ये दो दिलो का संगम है 
इसे ऐसे ही मत छोड़ो ।

खाई थी तुमने जो कसमे साथ मिलकर
ये जन्म जन्म का रिश्ता है ।
इसे पल भर में मत तोड़ो 

बिन तेरे ये सफर मुक्कमल कहा है 
इन सुनसान राहो पर 
मुझ अकेले को मत छोड़ो 

Written by 
Zishan alam



The zishan's view

This is zishan alam .Writer .Poet.and Author of Lafzon ke mousam me .Social Activist.मुस्लिम का बेटा हूं हिंदू का भाई हूं लेकिन दीवाना हूं इंसानियत का //

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