किसी मजलूम के हक के लिए लिखना पड़े तो बेधड़क लिखूंगा जुल्म के आगे घुटने नही आवाज़ बुलंद रखूंगा मै कोई ख़रीदा हुआ कलमकार थोड़े हूं जो...
तुम्हारे लिए /Tumhare liye
सोचता हूं किस तर्ज़ से लिखूं तुम्हारे लिए या ठीक वैसे लिखूं जैसे तुम मुझे मिले थे सोचता हूं सुनहरे सुनहरे शब्दों में लिखूं तुम्हार...
तुम्हारे लिए /Tumhare liye
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मई 08, 2021
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ढलता सूरज /Dhalta suraj
लिखना छोड़ दूं मैं बाज़ नही आऊंगा कोई ढलता सूरज हूं जो नदी में डूब जाऊंगा मुझे मालूम हैं अज़ीयतें मेरे हक़ में लिखी जा सकती हैं मगर कोई ...
ढलता सूरज /Dhalta suraj
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मई 06, 2021
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हां यारों / Han yaron
मनमानी से कट रही थी जिंदगी ख्यालों में रहने लगा हूं हां यारों मै उसके इश्क़ में डूबने लगा हूं सोचा था रूक जाऊंगा एक हद तक मगर भावों में...
हां यारों / Han yaron
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मई 06, 2021
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महज़ तुम / Mahaz tum
मेरे एहसासों का एक प्यारा सा एहसास हो तुम मेरे ख्यालों का एक खुबसूरत सा ख्याल हो तुम मेरे ख्वाबों का मुकम्मल ख्वाब हो तुम टूटे ख्वाबों ...
महज़ तुम / Mahaz tum
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अप्रैल 30, 2021
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kora kagaz /कोरा कागज़
मैंने हर्फों की शक्ल में तुम्हे लिख दिया हैं ख्यालों के दरिया से लफ़्ज़ों को निकालकर कोरे कागज़ पर बिखेर दिया हैं कोरा कागज़ हैं खाली पन्ने ह...
kora kagaz /कोरा कागज़
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अप्रैल 03, 2021
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उस शाम के बाद /Us sham ke bad
सूरज की तरह डूब गया मैं उस शाम के बाद आसूं छलक जाते हैं आखों से तेरे जाने के बाद मुलाक़ात हो जाती हैं ख्वाबों में कभी कभी उनके आ जाने के ...
उस शाम के बाद /Us sham ke bad
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फ़रवरी 13, 2021
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मेरा भारत महान mera bharat mahan
मेरा भारत महान बेशक मेरा भारत महान है जितनी ख़ुशी मुझे ये बताते हुए महसूस होती है मै मुस्लिम घराने से ताल्लुक रखता हूँ उससे जयादा फक्र म...
मेरा भारत महान mera bharat mahan
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जनवरी 28, 2021
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नए अल्फाज़ लिखने की तमन्ना /nae alfaaz likhne ki tamanna
कुछ नए अल्फाज़ लिखने की तमन्ना लिए लिखता हूं पसंद आ जाए तुम्हे कुछ वो जज़्बात लिखता हूं मुकम्मल हो जाता हैं जब कोई कलाम मेरा फिर से न...
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जनवरी 28, 2021
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तुम मेरा वो हिस्सा हों /TUM mera wo hissa hoon
तुम मेरा वो हिस्सा हो जिसे मैं हरगिज़ खोना नही चाहता नज़रों से दूर ज़रूर हो तुम मगर नज़रों से दूर नही रखना चाहता एहसास तुम्हारे होने का ता...
तुम मेरा वो हिस्सा हों /TUM mera wo hissa hoon
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जनवरी 23, 2021
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हुनर /Hunar
बड़ा अजीब हुनर हैं ये उनका बातों बातों में यूं रो देने का बहाना ढूँढ़ते रहते हैं वो अक्सर हमे भी रुलाने का वरना हमे शौक कहां हैं खामखाँ ...
हुनर /Hunar
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जनवरी 23, 2021
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पाकीज़ा इश्क /Pakiza mohbbat
मज़बूरी हैं तो बेधड़क होकर चले जाना ममतां की चादर बाप की पगड़ी से बढकर कुछ नही जानता हूं इश्क़ हैं बेशक तुमसे इश्क़ हैं वो इश्क़ जो इबा...
पाकीज़ा इश्क /Pakiza mohbbat
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जनवरी 17, 2021
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लिखता रहूं/Likhta rhun
लिखता रहूं तुम्हे मैं जिंदगी भर तुम वो ग़ज़ल बन जाओं मैं छोटा सा लेखक तो तुम हर्फ़ बन जाओ मैं कलम तो स्याही एहसासों की तुम बन जाओं फ़र्क ह...
लिखता रहूं/Likhta rhun
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जनवरी 17, 2021
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कभी तुम यूं मिलों ऐसे /Kabhi tum yun milon aise
कभी तुम यूं मिलो ऐसे मिलें हो हम पहले से जैसे देख के मुझे यूं कतरा गए मानों कही मुझसे अचानक टकरा गए फिर शुरू हो यूं सिलसिला बातों का गर...
कभी तुम यूं मिलों ऐसे /Kabhi tum yun milon aise
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जनवरी 17, 2021
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तेरे बगैर /Tere bagair
तेरे बगैर हम दुनिया को वीरान लिखेगें तन्हा खुद को राहों को सुनसान लिखेंगे वही लहजा वही जज़्बात वही कलाम लिखेंगे एक खत और हम तेरे नाम लिख...
तेरे बगैर /Tere bagair
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जनवरी 14, 2021
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मै रहूं या ना रहूं /Mai rahun ya na rahun
मैं रहूँ या ना रहूं कोई कमाल नही हो जाएगा बस इतना हैं अपने अल्फाज़ का एक एक पन्ना मायूस हो जाएगा जो लिख रहां हूं आज अल्फाज़ों को तोड़ मो...
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जनवरी 14, 2021
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आहिस्ता आहिस्ता /Aahista aahista
मैं और तुम हो एक गुमनाम मंज़िल के मुसाफिर कुछ गुफ्तगू करते चले आहिस्ता आहिस्ता मैं खामोश रहूं बस तुम्हें देखता रहूं तुम बोलो -बोलो ना कु...
आहिस्ता आहिस्ता /Aahista aahista
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जनवरी 02, 2021
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यार मेरा क्यों बदल गया /yaar mera kyun badal gya
यार मेरा क्यों बदल गया बिन बादलों के जैसा क्यों बरस गया कहता था यार मेरा याराना है अपना पुराना अव्वल रंग है मेरा फिर क्यों अनेक रंगों ...
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दिसंबर 26, 2020
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वो गरीब बच्चा था /wo gareeb baccha tha
वो गरीब बच्चा था हालात का सताया हुआ था जाने वो कौन सी कैसी सी जिम्मेदारी थी जो आन पड़ी थी उसके नाज़ुक नाज़ुक कंधों पर जिसको वो अपने अरमा...
वो गरीब बच्चा था /wo gareeb baccha tha
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दिसंबर 26, 2020
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आज कुछ कहने का मन हैं /aaj kuch khane ka man hai
सुनों आज कुछ कहने का मन हैं जैसे झरने की तरह बहने का मन हैं समझ नही आता हर लम्हे तुम्हे महसूस करूं या गीत गजलों की तरह गुनगुनाता फिरूं ब...
आज कुछ कहने का मन हैं /aaj kuch khane ka man hai
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दिसंबर 26, 2020
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गुज़ारिश/Guzarish
फुरसत के कुछ पल दे अपने मुझे आ बैठ वक़्त निकालकर किसी शाम मेरे पास कुछ लफ्ज़ ऐसे हैं जो तेरे इंतज़ार में डेरा डाले बैठे हैं लफ़्ज़ों को...
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दिसंबर 19, 2020
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दिसंबर 19, 2020
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अंधेरा हैं / Andhera hai
मेरे साथ चल पागल अंधेरा हैं अंधेरा तो अंधेरा हैं ना झूठी आस का सवेरा हैं ना रोशन ये जंगल हैं मैं हूं तुम हो और सुनसान जंगल हैं जंगल तो जं...
अंधेरा हैं / Andhera hai
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दिसंबर 15, 2020
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किसान हूं साहब मैं /Kisan hun sahab mai
किसान हूं साहब मैं अपना हक मांगने आया हूं मैं कोई आतंकी नही हूं मैं जो डर रहे हो किसान हूं साहब मैं मैं बड़ी दूर दूर से आया हूं अपनी फरि...
किसान हूं साहब मैं /Kisan hun sahab mai
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दिसंबर 06, 2020
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दिसंबर 06, 2020
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आबरू का पहरेदार -- AABRU KA PEHREDAR
गहना इज्ज़त का तुम्हारी हमेशा आखों पर रखूंगा पर्दा लिबास का कभी हटने नही दूंगा खुदगर्ज़ नही हूँ मै खुद्दार रहूंगा तुम्हारी आबरू का पहरेदा...
आबरू का पहरेदार -- AABRU KA PEHREDAR
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दिसंबर 01, 2020
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दिसंबर 01, 2020
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