ज़ुल्म के ख़िलाफ़ उठ खड़े होना हर शहरी की ज़िम्मेदारी है’

जनवरी 05, 2023
( सब्र का मतलब यह नहीं है कि चुप-चाप ज़ुल्म सहते जाओ,  ज़ुल्म हर समाज में नापसन्दीदा है) कोई भी इंसान ज़ुल्म से मुहब्बत नहीं करता, इसके बावजूद ...

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दिसंबर 29, 2022
  ख़्वाबों तक महदूद होती तो सब कुछ ठीक था  मगर अब वो हक़ीक़त में लाहमदुद सी रहती हैं!   आस्तीन का सांप बनकर आखिर उसने भी ज़हर उगल दिया नादान था ...

मुहाफ़िज़ -- muhafiz

दिसंबर 25, 2022
  मोहब्बत और इज़्ज़त से हमेशा तुम्हें नवाज़ता रहूंगा मैं दुपट्टा सिर से तुम्हारा कभी गिरने नही दूंगा मैं पड़ी ज़माने की बुरी नज़र तुम पर तो तुम्हा...

ताजिर /tajir

दिसंबर 24, 2022
  बेशक ताजिर हूं मैं, तिजारत कारोबार हैं मेरा लेकिन एक उसूल पर गुज़ारी हैं ज़िन्दगी मैंने!! Of course I am a trader, trading is my business Bu...

करवटें - KARWATEN

दिसंबर 21, 2022
  बेचैन बेचैन करवटों में नींद कहां आती हैं हमसे पूछो हमारी रातें कैसे गुज़र जाती हैं किसी का ख़्याल किसी का मलाल हैं आखों में भीगी पलकों से दा...

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दिसंबर 20, 2022
महफ़िल में ख़ामोश देखकर तुझे अजीब सा लग गया सब वाह वाह कर रहे थे बस एक तू ख़ामोश रह गया!! अभी कलम को हाथ ही लगाया था स्याही सुखी हुई मिली कल ही...

रहबर RAHBAR

दिसंबर 20, 2022
मेरे रहबर मुझे कोई रास्ता तो दिखा दे या मेरे  हक़  में कोई  दुआ ही  कर  दे खो गया हूं मैं दुनिया की भीड़ में कहीं हो सके तो मुझे मेरी मंज़िल तक...

ख़ामोश हैं - KHAMOSH HAI

दिसंबर 19, 2022
हम ख़ामोश हैं अभी उन्हें कुछ कह नही पाएंगे कह भी दिया तो  हम  ज़्यादा नही  कह  पाएंगे हम ख़ामोश हैं अभी ख़ामोश रहने दो फ़ायदा हैं बोलने लगे तो ह...

मेरा आसूं MERA AANSU

दिसंबर 06, 2022
    मेरा आसूं मोती बनकर एक दिन ज़मी पे गिर गया  लाख पोंछा आस्तीन से मगर आखं से टपक गया  किसको मालूम था मुझमें दर्द की शिद्दत कितनी थी  मुझे  ...